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Showing posts from August, 2018

हिन्दू धर्म श्रेष्ठ क्यों हैं?

जीवन को श्रेष्ठ तरीकों से जीने के लिए कुछ विचारों को जीवन पर्यंत सींचना पडना है। सभी को अपनी तरह से जीवन जीने का अधिकार है परन्तु दूसरे किसी भी जीव के अधिकारों का हनन करके सिर्फ अपने ही जीवन की भलाई सोचना यह स्वार्थ है। प्रकृति की सुसंवादिता बनाए रखने के लिए श्रेष्ठ विचारों का संकलन मन, वचन और कर्म से करते रहना ही धर्म है। जो धारण करने योग्य है वही धर्म है। परन्तु समय परिवर्तन, परिस्थितियाँ और सामाजिक उथल-पुथल में धर्म को समझना और अधर्म से बचना लोगों के लिए कठिन बनने लगता है जबकि ऐसा है नहीं। धर्म और अधर्म ये दो ही संकल्पनांए है परन्तु आज के समय में धर्म को गलत अर्थ से देखा जा रहा है। पूजा पाठ करनेवाले धार्मिक और न करनेवाले नास्तिक इस प्रकार लोगों की समझ बन गई है। अल्लाह, ईसा मसीह और न जाने कितने ही ईश्वर हमने बना दिए और फिर ईस्लाम, ईसाई, जैन, सीख ऐसे धर्म भी बना दिये। धर्म का धारणा से, धृति अर्थात बुद्धि से और धरती अर्थात देश से सीधा संबंध है। जो जिस देश काल और परिस्थिति में रहेगा उसे उस सुसंवादिता को बनाए रखने के लिए श्रेष्ठ कर्मों को और विचारों को जीना पडेगा। यही कारण है कि हिन्द...