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Showing posts from 2018

हिन्दू धर्म श्रेष्ठ क्यों हैं?

जीवन को श्रेष्ठ तरीकों से जीने के लिए कुछ विचारों को जीवन पर्यंत सींचना पडना है। सभी को अपनी तरह से जीवन जीने का अधिकार है परन्तु दूसरे किसी भी जीव के अधिकारों का हनन करके सिर्फ अपने ही जीवन की भलाई सोचना यह स्वार्थ है। प्रकृति की सुसंवादिता बनाए रखने के लिए श्रेष्ठ विचारों का संकलन मन, वचन और कर्म से करते रहना ही धर्म है। जो धारण करने योग्य है वही धर्म है। परन्तु समय परिवर्तन, परिस्थितियाँ और सामाजिक उथल-पुथल में धर्म को समझना और अधर्म से बचना लोगों के लिए कठिन बनने लगता है जबकि ऐसा है नहीं। धर्म और अधर्म ये दो ही संकल्पनांए है परन्तु आज के समय में धर्म को गलत अर्थ से देखा जा रहा है। पूजा पाठ करनेवाले धार्मिक और न करनेवाले नास्तिक इस प्रकार लोगों की समझ बन गई है। अल्लाह, ईसा मसीह और न जाने कितने ही ईश्वर हमने बना दिए और फिर ईस्लाम, ईसाई, जैन, सीख ऐसे धर्म भी बना दिये। धर्म का धारणा से, धृति अर्थात बुद्धि से और धरती अर्थात देश से सीधा संबंध है। जो जिस देश काल और परिस्थिति में रहेगा उसे उस सुसंवादिता को बनाए रखने के लिए श्रेष्ठ कर्मों को और विचारों को जीना पडेगा। यही कारण है कि हिन्द...

स्वयंवर और विवाह

जो कन्या विवाह योग्य हो जाती है, उसका विवाह उसके माता-पिता और सगे संबंधियों द्वारा योग्य विवाह योग्य वर से कर दिया जाता है। स्वयंवर तो राजकन्याओं का होता था, शायद राजकन्याओं को इसके लिए योग्य शिक्षा भी मिलती हो। साधारण परिवार के लोगों में विवाह परिवार में सबकी सहमति से होता था और आज भी होता है। आजकल स्वयंवर नहीं होता है। कन्या का विवाह योग्य होना मतलब शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक आदि स्तरों पर विकसित होकर संपूर्ण जीवन किसी योग्य पुरुष के साथ जीने का निर्णय लेने की क्षमता से है।  जो कन्या अपना संपूर्ण जीवन सौपने को तैयार हो गयी है उसे अपनी पसंद का योग्य वर अपनी कसौटी से चुनने की अनुमति होती थी, उसे स्वयंवर कहा जाता था। शायद विदेशी आक्रमणों और राजा महाराजाओं आपसी लड़ाईयों के चलते कन्याओं की स्वयंवर की स्वतंत्रता को विराम मिल गया हो। सीताजी और द्रौपदी के स्वयंवर में एक बात समझ में आती है कि उन्हें सामर्थ्य, परिवार और गुणों के आधार पर ही अपने वर को चुना था। जीवन में उनके कष्ट भी आये लेकिन उन्हें कभी अपने परिवार से शिकायत नही रही। परंतु  समय बदला और अब माता-पिता जिसे योग्य समझत...